नेता जी
👌नेता जी 👌
नेताओं का लक्ष्य है मात्र
जीतकर मेवा चखना
मूर्ख जनता सोचती है
उन्हें है उसकी सेवा करना।।
हाथ जोड़ना ,पैर पकडना
मातमपुर्सी का फर्ज निभाना,
ये सभी उनके छलावे है
मूर्खों को बहलाना।।
राजनीति में सिद्धान्त कैसा
सिद्धान्त तो एक बला है
जैसे हो पद पाना है
राजनीति तो महज एक कला है।।
जनता को समझे जूती
चाहे ताली पिटे या दे गाली।।
जनता को कुछ नहीं मिलना
उन्हें मिले मलाई, छाली।
इनके इधर उधर कूद से
लज्जित है वेचारा बन्दर,
राजनीति में इनके गन्ध से
मात खा गया निरीह छुछुन्दर।।
गिरगिट भी अब शर्मिंदा
कैसे अब रंग बदलूँ?
लगता है नेताओं जैसे
सफेद वस्त्र से तन ढँकलूं।।
नरेंद्र
01.12.2019