राधा का अनुरोध

शीर्षक---मैं पकड़ी जाती हूँ!

बांसुरी की तान 
मत छेड़ो श्याम,
                कि  मैं पकड़ी जाती हूँ।
बाँसुरी की तान सुन
मैं  तो जाती हूँ झूम
 खो  देती हूं मैं सुध बुध 
दिल और दिमाग एक दूसरे के बिरुद्ध,
माता पिता  रहते आस पास
तनिक न रहता इसका अहसास
मैं मचलने लगती हूं
मिलने को बहाना ढूढ़ने लगती हूँ।।
जब  मै घड़ा उठाती हूँ 
कि नीर लाने जाती हूँ
तो माँ खिन्न हो जाती है
और घड़ा छीन ले जाती है
कहती -
पानी लाने का यह कौन मुहूरत
अभी पानी की नही है जरुरत।
जब डलिया मैं उठाती हूँ
कि फूल लाने जाती हूँ।
तब तात कहने लगते है-
बाल बच्चे मुझे ही ठगते है!
पूजा पाठ तो सवेरे होगा
तत्क्षण पुष्प का क्या होगा ।
जब मैं घर से बाहर जाने लगती हूँ
कि ललिता से मिलने जाती हूँ
तब माँ घर के अंदर खींच ले जाती है
और डाँट डाँट समझाती है।
बेटी तू अब हो गयी जवान
इज्जत आबरू का रखो ध्यान।
बाहर मुरली बजा रहा है अवारा,
घर से निकलना नही है गवारा।

लाख लाख मै ढूंढती बहाना
तौ भी मना है कहीं आना जाना।
बिरह वेदना सही नहीं जाती
माँ से कुछ कह भी न पाती।
यही हाल अगर रहा श्याम
तो तेरी राधा दे देगी जान,
अतः हे कृष्ण ,हे श्याम
मुझे मत करो बदनाम
मत छेड़ो मुरली की तान
               कि मैं पकड़ी जाती हूँ।।

नरेंद्र