राहूंल पर व्यंग्य

60 वर्ष पहले मदर इंडिया फ़िल्म बनी थी और आज #'विदेशी मदर'#फ़िल्म बने तो ये गाना प्रस्तुत है
पहला गाना
#मंदिर मंदिर द्वारे द्वारे, जाने की मजबूरियां, 
सत्ता सत्ता रटते रटते,पड़ गई है झुर्रियां।।
वोटर वेदर्दी ने मुझे ,झोका गम की आग में,
लगता है pm पद,नहीं है अब मेरे भाग में।
पल पल मम्मी रोये,छलके नैनो की गगरिया।
सत्ता सत्ता रटते ----//
माँ अपनी अँखियों में,सपना रखी थी संवार के,
लगता है दो आंसू लेकर,आशाएं सब हार के।
सम्प्रदाय के मेले में ,लूट गई जीवन की गठरिया।
मंदिर मंदिर द्वारे द्वारे,-----//
सत्ता के खातिर अभी तक,लायी न दुल्हनियां,
पद के ई चक्कर में,यूँही बित गईले जवनियां।
अब न जाने अल्लाह कैसे,बीतेगी उमरिया,
मंदिर मंदिर द्वारे द्वारे ,जाने की मजबूरिया।।#

दूसरा गाना

#राजनीति में हम आये है, गम झेलना ही पड़ेगा,
राजनीति अगर जहर है,पीना ही पड़ेगा।
 हर बार भी हार कर,जंग लड़ते ही रहेगें
जल जाये रस्सी जैसी, मगर ऐंठते ही रहेगें।
गम धर्म ने दिया है,तो वही गम  दूर करेगा,
राजनीति अगर जहर है,पीना ही पड़ेगा।।
मज़हबी है वो जिसे न दुनियां की शरम है,
दुनिया में सिर्फ  घूमना ही उसका करम है।
देश खातिर वह कुछ कभी नहीं करेगा,
राजनीती अगर जहर है ,पीना ही पड़ेगा।।
खानदानी ठप्पा है, ना डर गम से तू ऐ दिल,
पार्टी में तो कही कुछ भी  नहीं है मुश्किल।
सत्ता मिलेगी जब ,वह कुछ गड़बड़ करेगा,
तबतक तो मुझे यूहीं,प्रतीक्षा करना ही पड़ेगा।।
राजनीति में अगर आये हैं,जीना ही पड़ेगा,
राजनीति अगर जहर है पीना ही पड़ेगा।#
नरेंद्र