गमछा चालीसा

नरेन्द्र कृत "गमछा चालीसा'

💐नमन गमछे महाराज को,जिनके गुण हज़ार।
तांती, बुनकर ,पटवा के घर मे लिए अवतार।।
तंतु तनय ,उत्तम वसन,अनेकानेक है रूप,
पूरे भारत मे सब धारण करे ,रंक हो या भूप।। 
गमछे महाराज के चतुर्दिक फैला है प्रकाश
नीचे कुछ गुण गिनाने का "नरेंद्र का तुच्छ प्रयास💐

 उत्तर  से दक्खिन दिशा  गाजे
सबके कांधे  ही आप बिराजे ।।1।।
धन्य धन्य   है गमछा महाराज
बिहारियों  के  है आप सरताज।।2।।
आपके है  रूप व गुण अनेका
बखान न कर सकहिं विवेका।।3।।
ग्रामीणों के  आप अति ही प्यारे,
विभिन्न रंगों में लगते न्यारे।।4
मख्खी मच्छर शरीर पर  आये
तुरंत आपही हांक मार भगाए।।5
जो माथे पर आपसे ढकता
धूप बतास तनिक न तकता।।6
गलमोछा बांध जो बाहर जाए
लू लहर का नहीं भय सताए।।7
सज्जन के पास नही हो छाता
तब वर्षा से  है आप बचाता।।8
💐सर ढके,शरीर बचे, आपके गुण  अतिमहान।
जो बन्दा ओढ़े आपको,न हो उसको सर्दी जुकाम।।💐

मजदूर किसान के आप दुलारे
बहु कारज उनके आप सँवारे।।9
खेत बघार में आप बिछावन
गरीब गुरबा के अति मन भावन।।10
देह पोछना हो वस्त्र बदलना
स्नानगृह के आपही हो गहना।।11
जब जब लोगन के नाक बहे
वो गंदगी सब आपही सहे।।12
आप पोछते सब का पसीना
चाहे सज्जन हो या हो कमीना।।13
शोक में बहे जब अश्रुधारा
आप ही पोछते देते सहारा।।14
दुकान जब  सौदा लेने आते
थैला झोला जब कुछ न लाते।।15
आप ही में बांध लेते सामान ,
घर ले जाना हो जाता आसान।।16
जीर्ण होते तो आप जाते फेंके।
घर की  प्यारी नारी जब देखे।।17
तब आप से  लेती काम पोछाई,
घर आंगन की साफ सफाई।।18
चोर अपराधी को भी आप भाते,
आपही से वे पहचान छिपाते।।19
किसी के फटे पैंट पिछवाडे
आपही उसके इज्जत सँवारे।।20
कोई फेंटा बांध करे रंगदारी
 कोई कटि बांध झारे रोबदारी।।21
ढोना आसान है ,बांध मुरेठा
 चाहे धान का बोझा या लरेठा।।22
 पीना हो  किसी को शर्बत पानी
छाने आपसे ताकि न हो  हानि।।23
आज कोरोना आतंक मचाये,
मास्क के रूप में काम हैं आये।।24
कुकर्मी सुकर्मी सबहीं अपनाए
स्वहित  आपको काम मे लाये।।25
"💐कोई पहन पूजा करे, कोई करे पहन कुकर्म।
जिसकी जैसी मर्ज़ी,आपमे न कोई हर्ष व गम।।💐
अमीर हो या गरीब के गर्दन
सबको आप करते हो मर्दन।।26
देह के मैल आप छुड़ावत
स्नानवक्त जो पीछे ले जावत।।27
मुल्ला हो  या  कोई मौलवी पंडित।
सबके माथे कांधे  रहते लुंठित।।28
मार पीट में आप  हो हथियारा
गांठ बांध लोग करे प्रहारा।। 29
जीवन से कोई होय निराशा
गले मे डाल  वो लगावे फांसा।।30
मानव प्राप्त करे देव स्वरूपा
आपही रहते तहाँ कफ़न रूपा।।31
आप बिना न  हो कोई प्रयोजन
किसी उत्सव का हो आयोजन।।32
जन्म ,शादी हो या हो अंत श्राद्ध
सभी धर्म के आप आते कार्य।।33
श्राद्ध में  यदि देना हो दक्षिणा,
अंगवस्त्र से करना हो परिक्षणा।।34
तब आपही से होए विप्र की पूजा
आपसे सस्ता नही वस्त्र कोई दूजा।।35
💐धन्य गमछा !जो रिश्ता बनाये रहे पुरोहित यजमान।
  यजमान की इज्जत बचे,मिलत पुरोहित को सम्मान।।💐
राजनीति की गंदी  गलियों में,
आप खूब दिखतो हो रैलियों में।।36
आपको  बांट दिया कई गुटों में,
राजनीति के घटिया कुत्तों ने।।37
दिखे भगवामय भाजपाई
नीले रंग में रंगे बसपाई।।38
हरा में समजवादी दिखता
लाल गमछा में वाम है चीखता।।39
नेता जितना करे काला धंधा
आपको ही साक्ष्य रखता कंधा।।40
💐भगवा,नीला,हरा,पिला सफेद रंग और गहरा लाल।
   नेता गर्दन पर डाले आपको ,तबहिं,बजावत गाल।।💐
इति
नरेंद्र सिंह
13.04.2020