कोरोना काल की दस रचनाएं

कोरोना काल मे रचित 10 रचनाओं 
 का संकलन आपके समक्ष प्रस्तुत

10.नरेंद्र की लेखनी से

सड़क पर  कुत्ते  अड्डे जमाये हुए है।बड़े कोई गुजर रहे हैं तो गुर्रा कर रास्ता दे रहा है।घर के सामने से दो बच्चे निकले उसे भौंक कर घर के अंदर कर दिया।सड़क पर एक बच्चा आ रहा था उसे आने की दिशा में ही लौटने को बाध्य कर दिया। अब मैं समझ नही पा रहा  हूं कि कुत्ते लॉकडौन का  मतलब  समझ गया या  सड़क पर अब अपना एकाधिकार समझ लिया है।22 दिनों से  खाली सड़के देखकर उसे लग रहा है कि सड़के अब उसी के लिए आरक्षित हो गयी है।किसी का आना जाना अब उसे नागवार लगने लगा है। पहले  कूड़े कचड़े की जगह पर अपना आधिपत्य समझता था और कचड़े चुनने वाले को अपना प्रतिद्वंदी मानता थ।पर अब तो उसके मनसूबे सातवे आसमान पर है और हर आम खास से दो दो हाथ करने  पर आमदा है।
मानो अब यह कह रहा हो---

💐मेरे अँगने में, तुम्हारा क्या काम है
जो है नाम वाला ,वह भी लॉकडौन है।।
जिसकी बड़ी कोठी ,उसका भी बड़ा नाम था
लिफ्ट से  उतरता  था ,सीढ़ी का नही काम था।।
जिसका घर छोटा ,उसको भी बड़ा गुमान था
जाते थे  दरवाज़े ,भगा देना उसका काम था।।
मानव होने का उसे ,बहुत  बड़ा गुमान था ।
कोरोना की आपदा का ,उसे  न कुछ भान था।
 अब अंदर ही दुबके रहो, बाहर कुत्ते को आराम है,
मेरे अँगने में ,तुम्हारा क्या काम है।।💐

या यह कह रहा हो--
👌मेरी गलियों में ना रखो कदम,आज के बाद
तेरे दर मांगने न जाएँगे कुछ आज के बाद।।
तेरे दर पर झांकना,समझ लेना एक सपना था
अब घर मे ही बैठे रहो जो तेरा अपना था।।
हमे अब अपना न समझना आज के बाद
मेरी गलियों में न रखना कदम आज के बाद।।💐
नरेन्द्र
16.04.2020

9.👌कोरोना का दहशत👌

दहशत के साये में ,आज जी रहे हैं लोग,
भय से फटे कलेजे , आज सी रहे हैं लोग,
कोरोना से डर डर  ,आज रह रहे है लोग,
बिना मौत के मर मर , आज रह रहे है लोग,
घर मे बन्द हो आज अकुता रहे है लोग,
चीन की करनी से आज छटपटा रहे है लोग।
जानवर ही होता तो अच्छा , कह रहे है लोग,
उसे कोरोना का डर नही,जैसा सह रहे है लोग
सूक्ष्म वायरस से आज ,बहुत डर गए है लोग
सिर्फ कहने भर आदमी ,आज रह गए हैं लोग।।
दहशत के साये में ,आज जी रहें है लोग।
भय से फ़टे कलेजे ,आज सी रहे है लोग।।
नरेंद्र
09.07.2020

8 👌कोरोना से बचाव👌

#वीर तुम अड़े रहो
घर मे  तुम   पड़े रहो
घर से कोई बाहर जाए नही
घर मे बाहरी कोई आये नही
इस नियम का न अपवाद हो 
ताकि देश न बर्बाद हो
चाहे जो मजबूरी हो
पर सोशल दूरी जरूरी हो
रहो घर मे आराम से
मत निकलो कोई काम से
घर मे रामायण पाठ करो 
या कोई मन्त्र जाप करो
मन लायक गाना सुनो
या और कोई शौक चुनो
या tv से चिपके रहो
या चादर में दुबके रहो
नेट पर  सदा व्यस्त रहो
ताकि मनहूसियत से न ग्रस्त रहो।
वीर तुम अड़े रहो
घर मे तुम पड़े रहो#
नरेंद्र
7.👌वस्त्र वार्तालाप👌

💐प्रेस किया हुआ वस्त्र
पड़े रहने से था त्रस्त
फुलपैंट  बोला शर्ट से
एक बात बोलूं झट से--
" तुम्हे कुछ हो रहा है अहसास
मालिक है कहीं आस पास?
कई दिनों से न कोई आहट
न कोई सुबुगाहट
इधर न हमे उलट रहा है
न कभी पलट रहा है
न उपयोग कर रहा है
न दुरुपयोग कर रहा है
ऐसा मानो लग रहा है
मेरा मन कह रहा है
मालिक लगता है मर गया है
या कोई आफत में पड़ गया है।"
एक गन्दा कपड़ा यह सुन झल्लाया
जोर से चिल्लाया--
"तुम लोगो पर लानत है
हमारे मालिक बिल्कुल सलामत है,
वो  वेचारा बाहर जा नही रहा है 
इसलिए तुम्हे अपना नही रहा है।
बाहर कोरोना ही कोरोना है
अतः उसे घर  से बाहर नही होना है।
सिर्फ खाता है और पसरता है
कहीं नही तनिक ससरता है।
सुना है 14 अप्रैल तक बन्दी है
अभी पड़े रहो ,इसी में अक्लमंदी है।
मालिक पूरा स्वस्थ है
उसमे इम्युनिटी जबरदस्त है।"💐
नरेंद्र
04.04.2020

6😢.जूत्ते की व्यथा😢
एक जूत्ता सोचा मन ही मन
स्वामी क्यों नही रहा पहन,
कई दिनों से अकड़ी देह
मालिक का नहीं जो मिला स्नेह।
अपना जोड़ा से वो जुत्ता बोला
अपने मन का राज को खोला-
"मेरी बात को सुनो मेरा यार
मन मे आ रहा   है कुविचार।
स्वामी कहीं न जाता पहन के,
इसपर विचार करो गहन से।
लगता है मालिक दिया त्याग
हमदोनो का फूट गया है भाग।
कितना उसका था हम प्यारा
फिर भी हमे  वे क्यों दुत्कारा।
प्रतिदिन हमें चमकाता था,
पहन हमे वो इठलाता था।
नहीं किया हम विश्वासघात
गरमी ,जाड़ा हो या बरसात।
कभी हमने न पैर को काटा
क्योंकि ठहरे हम जुत्ता  बाटा।
जूत्ता, कुत्ता और असली यार,
कभी न होता ये तीनो गद्दार।।
ये सदा होते  नमकहलाल,
चाहे सामने खड़ा रहे काल।
स्वामी को सदा दिया हम सुख
फिर भी त्यागा इसी का दुःख।"
दूसरा बोला -
"स्वामी पर  हम  करें विश्वास
धैर्य रखे कायम रहे  आस।
आंख कान बंद रखते हो,
बाहर कुछ नही देखते हो।
बाहर घूमता दुष्ट कोरोना,
चुपचाप पड़े रहो ये कोना।
घर से बाहर नही  है जाना ,
सामाजिक दूरी  है बनाना ।
यदि घर मे नही रहना है
आगे और भी कष्ट सहना है।
भारत मे कोरोना  को दो मात।
मालिक को हमसब दे साथ।
घर मे रहो  सब लॉकडौन।
कहो कोरोना डाउन डाउन।।""
नरेन्द्र सिंह
17.04.2020

5.😢मोबाइल की वेदना😢
मोबाइल कहे मालिक से --मुझे राहत दें   नाथ,
उंगली करना कम करो,अब बंद करो आघात।।
धरती पर न जाने ,कैसे कैसे पैदा हो गए लोग।
जिसे सिर्फ दूसरों को ,लग गया कष्ट देने का रोग।।
जबसे इसके पास  हूँ आया,तनिक न पाया सुख
उंगली से दबा दबा कर मुझे,सदा दिया ये दुख।।
कभी हँसता, कभी गुनगुनाता, कभी ये  बुदबुदाता है
पता नही ये मुझसे ,क्या असीम आनंद को पाता है।।
ये अपने पागल ,मित्र भी पागल,पागल है संसार
इसके मोबाइल प्रेम से ,मोबाइल ही है शर्मसार।।
 मन की बात तो लिखता नही,तौ भी समझे ये श्रेष्ठ
दिन रात यूँही करते रहता,इधर उधर  कॉपी पेस्ट।।
इधर से आया उधर को  भेजना ,दिन रात का काम
मुझे चैन से रहने न देता,जीना कर दिया मुझे हराम।।
माता- पिता, पुत्र,पत्नी जब भी रहता परिवार के संग
आपस में कोई बात न करता ,सभी मुझे ही करता तंग।।
हार्दिक कष्ट होता उस वक्त,जब फैलाता ये अफवाह
मुझे ये माध्यम बनाता जिससे मेरा दिल रहा  कराह।।
मेरे बिना चैन नही  इसे,भले रह जाय ये भूखे पेट,
सब अभाव झेल  सकता  ,पर चालू रहे इसका नेट।।
मेरे बगैर न जी सकता है ,ये मेरा पक्का दीवाना है
यही एक खुशी की बात, यह नही अफसाना है।
नरेंद्र
22.04.2020

4👌.प्रवासियों  भागा क्यो?👌
आखिर वहां से क्यों भागा
जब वहां के अच्छे है राजा
मुफ्त में राशन
मुफ्त में पानी
मुफ्त में बिजली 
सब कुछ मनमानी
स्वास्थ्य सेवाएं 
स्कूल हुए अच्छे
सभी  विधायक बहुत ही सच्चे
आखिर वहाँ से क्यों भागा?
क्यों बना मजबूर अभागा?
तेरे को,मेरे को ,अब मत करना
अपने असली रंग में रहना
 यहाँ न नाम लेना केजरीवाल का
वही जिम्मेवार है तेरा बुरा हाल का।
अपनी भाषा ,अपना वेश
अपनी मिट्टी ,अपना परिवेश
घर की सूखी रोटी भली
घर ही रहो जहां रामकली
छोड़ो शहर की चमक दमक
बेकार है सिक्को की खनक
घर मे रह जोतो खेत
भरो अपने भी,और दूसरों के पेट।।
नरेंद्र
16.04.2020

3.गाना
💐नारद आज होते तो वे रहते परेशान,
किसको सुनाते वे जहान की दास्तान।
जहां भी जाते ,बंद मिलता  हर मकान,
पुकारते ,पर कोई बाहर न आता यजमान
सड़को व गलियों में भी न दिखता इंसान
किसको सुनाते वो आज जहां की दास्तान।
कैसे दुरुस्त रहता उनके पाचन संस्थान,
 बिना चुगली के जिन्हें न पचता खानपान,
आज कोई न निकलता सुन नारायण नारायण
आज नारद कैसे ये सब सह पाते अपमान।
विष्णु से कहते जा,क्या ये किया भगवान
कोरोना को भेज  नीचे,क्यों मचाया कोहराम।
"नारद तू शांत रहो, होने दो  ये घमासान,
शक्तिशाली देशों को  थोड़ा तोड़ने दो गुमान
देश और व्यक्ति नही,समय होता  बलबान,
नारद तुम भी  कहीं छिप जा सुनसान।"
नारद आज होते तो वे रहते परेशान
किसको सुनाते वे जहां की दास्तान।
नरेंद्र 30.03.2020
2.तर्ज--हंसते हंसते रोना सीखो--

💐सोते सोते जगना सीखो ,
जगते जगते  सोना
बाहर मत कोई निकलो
अरे बाहर घूमे  'कोरोना' ।
अपने बन्द रहो, बंद रहे मुना मुनियाँ
बस घर को ही समझो ,अपनी सारी दुनियां।
रामायण महाभारत देखें,
कोई एपिसोड छोडो ना,
घर मे सब खेलो कूदो
चाहे जो भी रहे खिलौना।।  सोते सोते जगना----
साफ सफाई में व्यस्त रहो
साफ करो घर का कोना कोना।
बड़ी बड़ी खुशियां हैं,इन छोटी छोटी बातों में
जीवन को सुंदर समझो,जैसे कोई सपना सलोना।
प्रकृति का प्रकोप है ,पर मत कोई डर जाना
फैल रहे अफवाहों से,तनिक मत घबराना
विपदा  है ,टल जाएगी ,दिल को है समझाना
 घर  में बैठ सब,इस जंग को  मात दे दो ना।
सोते सोते जगना सीखो,जगते जगते सोना
बाहर मत कोई निकलो,अरे बाहर घूमे 'कोरोना'।।।💐

1💐कोरोना से डरो ना💐
सिर्फ ये सब करो ना!

"करे नमस्कार
रहे शाकाहार
हाथ धोएं हर साठ मिनट पर
बाहरी लोगों से रहे दूरी बनाकर
बस ट्रैन से न  करें सफर
ज्यादा से ज्यादा रहे घर ।
विदेश से आये से रहे 2 मीटर पर,
उस पर रखे कड़ी नजर।
लोगो का चेन  अगर टूटेगा
कोरोना का वायरस न जुड़ेगा
सब लोग करे परहेज़
जीवन को रखे सहेज
सरकारी हिदायतों को माने जरूर
मन मे न रखे कोई गुरुर
जितना हो बरतें संयम
दूर रहेगा आप से यम।।"
नरेंद्र सिंह,