प्रातः काली

अबके गईल कब आईब बिजली रानी, अबके गईल कब आईब।।।

ए जी तोहरे जाइते लोक है सुना,लतर पतर् जिंदगानी।
मच्छर काट काट जिए न देबे,गर्मी से अलगे परेशानी।
ए जी टंकी खनखन सुखी गईले,खत्म हो गेलो पानी।
सरकार और बिजली के गाली देते,जिभिया सबकेँ नशानी।।
अबके गइले कब अयबू बिजली-----
बालबच्चा अब पढाई छोड़के,कर रहल सब शैतानी।
ए जी इन्वर्टर तो टेटियाइ गइले,ओकर खत्म कहानी।
एकरा से अच्छा  पहिले हली , प्रकृति पर जिंदा जिन्दगानी।
विधवा विभाग के खुराफात देख, बिल में करे मनमानी।।
अबके गईल कब अयभू बिजली रानी,अबके गईल कब अयभू।।
नरेंद्र सिंह