दो सन्तों की हत्या (पालघर में )

😢दो सन्तों की हत्या😢

यही गुनाह था उनके कि
धर्म हेतु गृह को त्यागा था,
यही एक अपराध किया कि
धर्म से प्यार मन मे जागा था
यही अपराध हुआ उनसे कि
हिंदुत्व के ध्वजा वाहक थे
बेदर्दी से दोनों मारे गए
क्योंकि वे गेरुआ वस्त्र के धारक थे।
भीड़तंत्र का  जब अजीब
वीभत्स चेहरा सामने आया
दो पैर के जानवर सब
अपना नीच रूप दिखलाया।
रक्षक ही धकेल दिया 
जब खूनी दरिंदो के आगे
अब कहाँ निरीह  जाए
किससे शरण तब मांगे।
अशिक्षा ,जाहिलपन अपनी जगह
पर कानून का  भय न सताया
आखिर इन कमीनों के मन मेँ
किसने घृणा का भाव जगाया।
संतो !अब तुम्हे जागना होगा
कब तक कटते जायोगे,
कब तक इस तरह
अत्याचार को सहते जायोगे।
कौन है तुम्हारा रोने वाला
जो जीवन से रखते हो मोह,
दुष्टो को संहार करो अब
 निकलो छोड़ो आश्रम खोह।।
द्रोण बनो,दुर्वासा बनो
बनो  विश्वामित्र, परशुराम
आतंकियों के अंत के पहले
न लेना कोई सन्त विश्राम।।

नरेंद्र
24.04.2020