कन्या निरीक्षण
आजकल समाज मे सरकारी नौकरी पेशा कुंवारे लड़के की मांग काफी होती है और भाव भी आसमान छूता है।उस पर लड़के और उसके मां बाप के नाज नखड़े भी बहुत देखने को मिलते है।अनेक लड़कियों को छांटना आम बात है कभी उसकी ऊंचाई पर,कभी मोटाई पर,कभी दुबलापन पर ,रंग पर,नाक नक्श पर।कभी लड़की पसंद तो मन लायक मुद्रा नही मिलने पर।कभी कभी तो सास ससुर का ओहदा भी खोजा जाता है।
इसीतरह कोई लड़का बीस वर्ष में नौकरी पाता है और उस समय से उसपर अगुआ आने लगता है और लड़केवाले नाज़ नखरे करते करते 15 से बीस वर्षोँ तक सैकंडो लड़कियां छांट चुकता है। और जिसे बीस वर्ष पहले छांट चुका था उसकी बेटी की भी शादी की बारी आती है ।किसी ने बताया फलां शहर में एक नौकरी वाला सजातीय लड़का है ,बस बात बढ़ गयी ,देखा देखी की बात आ गई । तब देखिए क्या होता है।कविता में आगे की घटना।
( नोट-ऐसे हमारे बैंक में भी अनेक लड़के देखने को मिल जाएंगे जो इसी चक्कर मे चार दशक तक कुंवारे बैठे है ।इसी पर एक व्यंग्य कविता है थोड़ा मज़ा लीजिए।यह कविता बहुत पहले रची थी और pnb staff journal में प्रकाशित हुई थी उस समय कल्पना पर आधारित लिखी गई थी पर आज वही यथार्थ में देखने को मिल रहा है।)
शीर्षक:कन्या निरीक्षण।
💐माँ बेटी को,
शादी हेतु दिखलाने आती है,
पुत्री को सज धज कर लाती है
स्वयं पहले वर की झलक पाना चाहती है,
और कमरे बैठे वर को निहारती है।
वर को देखते ही,स्तब्ध रह जाती है
बीस वर्ष पहले की याद ताजा हो जाती है।
तत्पश्चात,
माँ पुत्री का हाथ खिंचती है,
ओठों को जोर से भींचती है,
और कहती है--
"पुत्री तू हट जा
उधर तू मत जा,
नही करनी है इससे शादी
नही करनी है तेरी बर्बादी।"
मां को सहसा देख अकुलाई
बेटी कुछ बात समझ न पायी
धीमे से मुंह खोली
और माता से बोली-
"क्या बात है अम्मा
जो बांधी ऐसी समां
क्या देखी वर में कमी
कुछ तो बतायो मम्मी।"
मां बोली-
"यहां से हट झटपट
मामला है बहुत लटपट
सब किस्से सुनाती हूँ
इस वर के बारे में बताती हूँ।"
बेटी को वहां से हटाकर
अपना मुंह बेटी के कान में सटाकर
कहती है फुसफुसाकर-
"यह लड़का वर नही बराठ है
इसका उम्र 15-20 कम साठ है,
मुझे भी ये देखने आया था
आपादमस्तक जांच कराया था
तुम्हारे नाना को काफी किया था जलील
और शादी कर दिया था कैंसिल
बहुत खेला था घिनौना खेल
इसीमे तुम्हारे नाना का हुआ था हार्टफेल।
इसकी फरमाईश की फेहरिश्त बहुत लंबी थी
और मांग करने की अदा फूहड़ और गन्दी थी
खोजता था सर्वगुण सम्पन्ना कोई देवी,
कमसीन षोडसी गुड़िया सी बेबी
सभी साजो सामान, कई लाख नगद,बारात का खर्चा,
एक महंगी कार और शहर में जमीन का पर्चा।
ये अनेको को डांटा है
सैंकड़ो को छांटा है,
अनेको को टहलाया है
बहुतों को बहलाया है।"
अतः इस रसम को यहीं पर तोड़ो
इस वर को अपने हाल पर छोड़ो।
हे!बेटी तू घर चल
इसी क्षण इसी पल।।💐