दशरथ ,दशरथ,दशरथ

दशरथ मांझी -MOUNTAIN CUtter
अतरी का पूत
 इरादा मजबूत
 पावन ग्राम गहलौर 
जहाँ था स्थायी ठौर 
गरीब का बच्चा 
दिल का सच्चा II
कद नाटा
 रंग काला 
क्षीण काया 
मन अ - माया 
दृढ निश्चयी 
पर्बत विजयी II
       असंभव को संभव कर दिखाया 
            दशरथ, दशरथ , दशरथ I 
थी घाटी संकीर्ण
 कंटकाकीर्ण 
यही वह ठांव 
जहाँ पत्नी का फिसला था पांव
 फिर क्या था ,मन में ठाना
 सरल राह है ,बनाना 
छेनी हथौड़ी और दोनों हाथ 
न कोई मशीन न कोई साथ
 अहर्निश ठक-ठक 
कठिनश्रम अथक 
न थका तन
 न उबा मन 
२२ सालों तक एक ही धून 
एक ही लक्ष्य , एक ही जूनून 
कठोर पत्थर को काटना 
और सुगम रIह बनाना II
       असंभव को संभव कर दिखाया 
          दशरथ, दशरथ , दशरथ I 
पागल कहते रहे लोग 
मजाक उड़ाते रहे लोग 
पर तनिक न उसकी परवाह 
सिर्फ मन में सरल राह, राह I 
भूखे पेट रहकर 
फटा गन्दा पहनकर 
भद्दे मजाक सहकर 
प्रकृति से लेते रहा टक्कर 
पर मन न हुआ आहत 
न थी अन्य कोई चाहत 
अहर्निश शिला खंड काटकर 
सुगम राह बनाकर 
          असंभव को संभव कर दिखाया 
              दशरथ, दशरथ , दशरथ I 
धन्य धन्य थी वो माँ 
धन्य गहलौर की माटी
 धन्य वह तीर्थ 
धन्य है वह घाटी 
जहाँ पैदा हुआ था दशरथ 
जिन्होंने अपनाया था कठिन पथ I 
        असंभव को संभव कर दिखाया 
          दशरथ, दशरथ , दशरथ I 

नरेन्द्र सिंह 
एम.ए,(भूगोल)
 एल.एल.बी.,
एम.बी.ए.