गाँव की ओर लौटें

💐लौट चलो अब गाँव💐

👌लौट चलो अब गाँव ,रहो किसान बनके
छोड़ो अब  ये शहर ,  इसे बिरान करके
वो गलियाँ, पथ,  वो मंदीर बरसों पुराना
वही सब तो अपना है शहर में सब बेगाना
बदलो विदेशी भेष ,रहो किसान बनके।
छोड़ो अब ये शहर ,इसे बिरान करके।
दूसरों के पेट जो भर सकता,आज खरीद के खाता
खेत खलिहान सम्भालो ,बनके अब अन्नदाता
गाँव मे  हरियाली लाओ,रहो अब  वहां जमके।
लौट चलो अब गांव, रहो किसान बनके।
कौवा मैना को पुकारो, आंगन में अन्न को छींटके
 चिड़ियां फिर चहके आंगन,अब न हमसे बिदके।
  स्वागत के लिए  अतिथि,अब न द्वार पर तरसे,
साधु ,भिखारी भूखा न लौटे,उनका आशीष बरसे।
छोड़ो अब सब  ये शहर ,इसे बिरान करके
लौट चलो सब गाँव ,रहो किसान बनके।
नरेंद्र
05.07.2020