सेक्युलेरिन कीड़ा

नरेंद्र की लेखनी से"°
सेक्युलेरीयन कीड़ा?
आप नए नए कीड़ों का नाम सुनते रहते हैं और उसके काटने से होने वाली बीमारियां भी देखने को मिलती रहती  है।पर आजकल एक सेक्युलेरियन कीड़ा भी बहुत लोगो को काट कर बीमार कर रहा है।सेक्युलेरियन कीड़ा इतने सूक्ष्म है कि नंगी आँखों से दिखाई नही पड़ता।पर जिसे ये काट लेता है तो बीमारी के लक्षणों  से ही पता  चलता है कि इस रोगी को अदृश्य सेक्युलेरियन कीड़ा ही काटा है।इसका असर मष्तिस्क पर पड़ता है।इस प्रकार के रोगी को देशभक्ति ,राष्ट्रप्रेम से काफी नफरत होने लगता है।उसके मन मे देश में असुरक्षा के भाव  आने लगते है।विदेश में बसने की इच्छा प्रबल होने लगती है।अपने धर्म और समाज से चिढ़ने लगता है। टुकड़े गैंग या देश के खिलाफ बोलने वालों को ये रोगी आदर्श मानने लगता है।पाकिस्तान ,फिलिस्तीन और चीन काफी आदर्श देश उसे लगने लगता है।ऐसे लोगों को भारत सरकार के द्वारा दिये गए अवार्ड को वापस करने की  इच्छा होती है।या कुछ रोगी गिरोह बनाकर सरकार पर प्रहार करने के लिए चिठ्ठी भी लिखने लगते हैं।युवा या युवती को ये कीड़ा काटता है तो उसके रोग को पहचानना थोड़ा कठिन होता है ,चूंकि उनकी बीमारी मैनिया या हिस्टीरिया से मिलती जुलती है । ऐसे रोगी एक ही नारे को बार बार शरीर को धुनते हुए गायेगा,डफली बजायेगा  और आज़ाद देश मे आज़ादी की मांग करेगा।लोकतांत्रिक व्यवस्था से नफरत करेगा।।रोगी निराश और हताश रहता है।ऐसे रोगी भगवा रंग को देखकर ऐसे भड़क जाता है जैसे लाल रंग के कपड़े देखकर भैंस।ये लोग देशभक्ति को  आरएसएस - भाजपा का पर्याय  मानता है।सबसे महत्वपूर्ण लक्षण है कि जय श्री राम ,वन्देमातरम और भारत माता की जय सुनकर  इनका रक्तचाप काफी बढ़  जाता है।कुछ रोगी के मन मे देश के टुकड़े करने का भी भाव उत्पन्न होता है।ऐसे ये कीड़ा  उत्तराखण्ड और हिमाचल प्रदेश को छोड़कर पूरे भारत को अपनी चपेट में ले लिया है पर कश्मीर ,केरल,बंगाल ,बिहार एवमं उत्तरप्रदेश में  महामारी का  रूप   ले लिया है। प्रारम्भ में ये बीमारी नेताओं तक ही सीमित थी पर अब ये लेखक,अभिनेता,फ़िल्मनिदेशक और छात्रों में भी फैल गई है।इस बीमारी को जड़मूल से मिटाने के लिए आयोग गठन की  जरूरत है।चूंकि ये बीमारी देश के लिए घातक है।
नोट-इस प्रकार के जो भी रोगी है वो इस लेख को पढ़कर क्रोधित न हों ।
नरेंद्र