चप्पल और मालिक
💐 चप्पल और मालिक💐
चप्पल तुम खूब बचाया
उस सज्जन का पैर,
गर्मी ,जाड़ा, बरसात में
रक्षा कर, कराया सैर।
कांटे ,कंकड़ ,ठोकरों से
सदा रखा तू खैर।
उसी की गलती से उसका
एक दिन फिसला पैर
गुस्सा फूटा तुम पर
अब तुम्हारी नही खैर
कस कर पटका उछाला तूझे
तुम रहा हवा में तैर।
"घर का मालिक और चप्पल
होता दोनो एक समान
जबतक ठीक तो ठीक है;
ठीकरा इनके माथे,जब कोई नुकसान।।
नरेंद्र
25.08.2020