प्यार एवम इश्क
प्यार एवं इश्क
प्यार एवं इश्क में बहुत ही बड़ा फर्क है i
एक अगर स्वर्ग है तो दूसरा बेडा गर्क हैii
प्यार मे वासना का कही स्थान नहीं है i
पर इश्क तो वासना का दूसरा नाम ही है ii
प्यार किसीसे कही भी खुले आम होता है i
पर इश्क के खुलने पर बुरा अंजाम होता है i i
प्यार प्यारा होता है ,सदा अनोखा ही होता है i
पर इश्क मे हमेशा धोखा ही धोखा होता है ii
प्यार का फल सदा सच्चा एवं अनूठा होता है
पर इश्क का फल अक्सरहां झूठा ही होता है
प्यार में ह्रदय सदा स्नेहिल एवं चंगा रहता है
पर इश्क में मन सदा उद्वेलित व अँधा रहता है
प्यार एक पवित्र बंधन जिसमे परमार्थ रहता है
इश्क एक इकरार है जिसमे मात्र स्वार्थ रहता है
प्यार का प्रभाव तो स्थायी एवं सुदीर्घ होता है
पर इश्क में क्षणभर भर के लिए तृप्त होता है ii
नरेन्द्र सिंह