नेता के गुण का अभाव

किसी ने व्यंग्य  में या सद्भावना दर्शाते हुए कहा कि चुनाव लड़िए , नेता आप भी बनिए।
मैंने  साफ साफ कह दिया---
##झूठ बोलने की आदत नहीं,
     फेकने में महारत नही।
पैसे कौड़ी उतना जमा नही,
बड़े नेताओं के दर क़भी रमा नही।
लूट खसोट की लत नही
नेतागिरी का कोई तत्व नही।
हया लज्जा मेरी मरी नही,
चमचे ,दलालो की फौज खड़ी नही।
तो कैसे बन सकूँ मैं नेता,
कलयुग है, नही है त्रेता##
नरेंद्र