जंगलराज की आहट

💐भूल गए वो दिन जब सबकी साँसे अटकी रहती थी।
"अभी तक बेटाआया नही"जब माएँ कहा करती थी।।
सत्ता की आस जगी ,तो शहरी मकान निहारे जा रहे,
ये तुम ,ये मैं कब्जायेंगे,मूंछ पर ताव फहराए जा रहे।।
कौन बनिया किसके निशाना,ये बाते भी अब चल रही,
किसके बच्चे को कब उठाना है ये बाते भी उछल रही।।
कहाँ पर जमीन है कैसे कब्जाना,मन मे लड्डू फुट रहे
सभी अपराधी प्लान सोच ,सब एक पार्टी से जुट रहे।।
हम मूर्ख जनता में समझ नही,जात पात में हम बंट रहे,
सोच लो  जल्दी से जल्दी,यहां इंसान रहे या लंठ रहे।💐
जय बिहार,तय बिहार
या हाय बिहार ,क्षय बिहार