जमाखोरन के दुखड़ा
जमखोरण के दुखडा
ई मोदिया का कईलक,हमनी के सब धन लुटलक।
बीन लाठी पैना के,दम भर हमनी के कुटलक।।
केतना लूट खसोट के,हम ई संजो के रखली हल
लाकर अलमीरा में,कोंच कोंच के हम सैंतली हल ।।
8 नवम्बर 8 बजे रतिया के,ई कर देलक सब मिट्टी।
मोदिया अगर मिलै अकेले,तो दम भर ओकरा पिट्टी।।
एके बोल में कर देलक,सब नोट कागज के टुकड़ा।
अन्दर अंदर गल रहलूँ हे,केकरा से कहूँ दुखड़ा।।
सात पुस्त ला जौर हम कईली, सभे भेल स्वाहाः।
मंगल जाय के सपना देखलि,आ गेली हम चौराहा।।
भाई भतीजा के देते रहती,जो देती गोतिया नइया।
तो आझ ई दिन न देखती,न पड़त हल अइसन हइया।।
खरीदल सोनमा जमींनमा पर भी ,एकर हउ नजरिया।
देखिहs एक न एक दिनमा ,वोहू बनतो एकर खबरिया।।
ई मोदिया का कैइलक, सभे हमनी के धन लुटलक।
बीन लाठी पैना के,ई दम भर हमनी के कुटलक।।
8 नवंबर 2016