प्रेम विवाह

अंतरजातीय या अंतर्धार्मिक प्रेम विवाह

हवस की भूख मिटाने को प्रेम का लबादा 
पहनाने की संज्ञा दी जाती है।
बीस वर्षों तक मां पिता 
जो किया उसे बेटी लात मार जाती है।
हवस के आगे मां पिता  को  ख्याल न कर
वंश को दगा दे जाती है।
ज्योही हवस के पुजारी का मन भर जाता है ,
तो दूसरी की खोज में लग जाता है।
कुछ तो अलग हो ,अलग घर बसाते है,
कुछ साथ रह घूंट घूंट कर जीवन बिताते है।
धर्म भी गया या जाति भी गई
जीवन भर मायके में कुलटा भी कहलाई।
प्यार व्यार कुछ नही यह एक व्यभिचार है,
यह लड़कियां न समझती, पर उसपर अत्याचार है
लड़के किसी लड़की को कहता है तुमसे प्रेम किया हूँ
वही लड़का अपने मित्रों से कहता है ,एक लड़की पटाया हूं
अच्छे घर की लड़की है उसे फंसाया हूँ।
इधर हवसिनी उस आवारा को दिल दे बैठती है
अपने इस दिखावे प्यार पर खूब ऐंठती है।
उधर हवसी मित्रों के बीच डींगें मारता है
सुंदर लड़की पटाकर किस्मत को सराहता है।
यही सत्य है ,ये कोई प्यार नही है
ये हवस का कुत्सित व्यापार है।
अरे पगली माता पिता भी तो सुंदर वर ही ढूंढते है
तेरे और अपनी इज्जत के लिए पाई पाई जोड़ते है
तुम्हारे ही सुखी जीवन की कामना करते है 
जीवन मे कितनी समस्यायों का सामना करते है।
पर तुम उसकी पगड़ी उछाल कर
दुलत्ती मार कर ,घर से भागकर 
मुंह काला कर लेती है 
और कालापन को प्यार का रंग देती है।
कुछ तो और हद कर जाती है
बाप पर ही रेप का आरोप लगा जाती है।
चाहे लव प्रमाद हो या लव जिहाद हो
भले कुछ इसमे अपवाद हो
भले कुछ  लड़कियां सफलता की सीढ़ियां चढ़ पाती है
पर अधिकाँश असफल हो धड़ाम से गिर जाती है
कुछ अपवाद को छोड़कर,यही सत्य है,
जो देखा वही लिखा,मेरा नही ये मन्तव्य है।
मुझे जितना कट्टरवादी समझो
या रूढ़िवादी समझो
पर जो सत्य है उसे 
कहकर ही रहूंगा,
प्रेम के पुजारी को
हवस के पुजारी ही कहूंगा।।
30.11.2021